Seed Policy 2026: भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘कृषि’ है, और कृषि की सफलता की पहली सीढ़ी है- एक बेहतर बीज। उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने हाल ही में ‘बीज नीति 2026’ का खाका तैयार किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को समय पर उच्च गुणवत्ता वाले, प्रमाणित और भरोसेमंद बीज उपलब्ध कराना है, जिससे कृषि उत्पादन और उत्पादकता दोनों में बढ़ोतरी हो सके।
दोस्तों उत्तर प्रदेश राज्य सरकार इस निति को नई दिशा देने के लिए जुट गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में आधुनिक बीज नीति–2026 को लेकर विस्तृत समीक्षा की। इसके साथ में यह भी बताया की बीज अनुसंथान, उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण की पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा।
क्या है बीज नीति 2026?
बीज नीति 2026 एक व्यापक रणनीति है जो न केवल बीजों की उपलब्धता बढ़ाती है, बल्कि उनके जेनेटिक सुधार और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता पर भी ध्यान केंद्रित करती है। इसका लक्ष्य पारंपरिक बीजों की तुलना में उत्पादकता को 20-30% तक बढ़ाना है।
नीति की मुख्य विशेषताएं
- प्रमाणित बीजों और ट्रेसेबिलिटी: सरकार ब्लॉक स्तर पर बीज बैंक स्थापित करेगी ताकि किसानों को दूर न जाना पड़े और भरोसेमंद बीज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बीज की एंड-टू-एंड ट्रैसेबिलिटी को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए है।
- जलवायु-अनुकूल बीज: बदलते मौसम, कम बारिश या अत्यधिक गर्मी को झेलने वाली फसलों की किस्मों पर जोर।
- किफायती दाम: निजी कंपनियों के साथ सहयोग करके प्रमाणित बीजों की कीमतों को नियंत्रित रखा जाएगा।
- उच्च उत्पादन और रोग प्रतिरोधी किस्म: उच्च उपज, रोग प्रतिरोधी और जलवायु सहनशील किस्मों के विकास को प्राथमिकता देने पर बल दिया और प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- सीड पार्क स्थापित: उत्तर प्रदेश में कम-से-कम 5 सीड पार्क स्थापित किए जाएंगे।इन सीड पार्कों में बीज उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण की सभी आधुनिक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
- किस्म रिलीज में तेजी: बीज अनुसंधान और नवाचार को तेज करने पर जोर दिया जाएगा और इसके साथ में सभी कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर (ICAR) संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और निजी बीज कंपनियों को एक साझा मंच पर लाया जाएगा।जिससे बीज अनुसंधान, नवाचार और नई किस्मों को जारी करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
किसानों को होने वाले प्रमुख लाभ
- पैदावार में भारी वृद्धि: प्रमाणित बीज सामान्य बीजों की तुलना में अधिक अंकुरण क्षमता रखते हैं, जिससे प्रति एकड़ पैदावार बढ़ती है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता: इन बीजों को प्रयोगशालाओं में उपचारित किया जाता है, जिससे फसलों में कीट और बीमारियां लगने का खतरा कम हो जाता है।
- लागत में कमी: जब फसल बीमार नहीं होगी और पैदावार अच्छी होगी, तो कीटनाशकों पर होने वाला खर्च खुद-ब-खुद कम हो जाएगा और अधिक-से-अधिक ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़े।
- बेहतर बाजार मूल्य: प्रमाणित बीजों से तैयार फसल की गुणवत्ता (दाना, रंग और आकार) बेहतर होती है, जिससे मंडियों में किसानों को अच्छा भाव मिलता है।
- किसानो की आय में बढ़ोतरी: सरकार का मानना है कि बीज नीति 2026 से न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।
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